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SDM ने पेट्रोल पंप कर्मी को जड़े थप्पड़, जवाब में कर्मी ने भी मारा तमाचा

कथित भीलवाड़ा राजस्थान में एक पेट्रोल पम्प के अंदर एसडीएम और पेट्रोल पंप कर्मियों के बीच झगडे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में देखा जा सकता है की एसडीएम ने पहले तो धमकी भरे लहज़े में पेट्रोल पंप में काम करने वाले कर्मचारी को डांटा और पल भर में उसे तमाचे जड़ दिए। उसके बाद से पेट्रोल पंप कर्मी ने भी जवाब देते हुए एसडीएम को थप्पड़ जड़ दिया। ये पूरा मामला भीलवाड़ा राजस्थान का बताया जाता है जिसमे एक एसडीएम पेट्रोल पंप में फ्यूल डलवाने गए थे।

क्या है पूरा मामला?

पेट्रोल पंप में लगे सीसीटीवी के माध्यम से यह वीडियो रिकॉर्ड कर ली गयी और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया गया। दरअसल एसडीएम साहब पेट्रोल पंप फ्यूल लेने गए थे और पेट्रोल पंप के कर्मचारी ने गलती से उनकी पिछली वाली गाडी में फ्यूल भरना शुरू कर दिया। बस फिर क्या था, एसडीएम साहब तमतमा गए और कर्मी से बहस करने लगे की मेरी गाडी में फ्यूल क्यों नहीं डाली। इसके जवाब में कर्मचारी ने कहा की आपने गाडी के फ्यूल वाली ढक्कन खोली ही नहीं थी तो दूसरे में भरने लग गया। फिर क्या था, एसडीएम साहब ने अपने अफसरी की धौंस जमाते हुए उसे तमाचे जड़ने शुरू कर दिए। कुछ ही पल में दुसरा कर्मचारी बीच बचाव करने आया था तब एसडीएम साहब ने उसपर भी तमाचों की बौछार कर दी। जिसके बाद दोनों कर्मचारियों ने मिलकर एसडीएम साहब को भी तमाचे जड़ दिए। जिसके बाद से ये पूरा मामला सोशल मीडिया पर छाया हुआ है।

इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है जिसमे ये दावा किया जा रहा है की यह वीडियो भीलवाड़ा राजस्थान का है। उसके अलावा ये भी जानकारी दी जा रही है की इस घटना के बाद से पेट्रोल पंप के 3 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। ऐसे में पुलिस की यह कैसी कार्रवाई है जिसमे दोषी की जगह बेकसूर लोग जेल की सलाखों के पीछे हों। अगर वही व्यक्ति एसडीएम नहीं होता तो शायद पुलिस भी इस तमाचे वाली घटना को इतने संवेदनशील तरीके से नहीं लेती। लेकिन बिना तफ्तीश किये सिर्फ एसडीएम साहब के बयान पर उन कर्मचारियों को गिरफ्तार करना कहाँ तक उचित है? हालांकि कर्मचारियों को हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं देना चाहिए लेकिन ऐसी परिस्थिति में जब कानून का पालक ही गलत करने पर उतारू हो तो आम नागरिक से अहिंसा की उम्मीद कैसे की जा सकती है? अब देखना है की इस घटना को उनके बड़े अधिकारी किस तरह से लेते हैं और उन बेकसूर कर्मचारियों को कब तक रिहा किया जाता है?

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